दिल में बैठा राम रमैया , तुझको ईश्वर नजर न आये।

awesome bhajan

Prernamurti Bharti Shriji

aims n ideals Prernamurti shri bharti shriji

दिल में बैठा राम रमैया , तुझको ईश्वर नजर न आये।
पत्थर मूरत आप बनाये, उसको फिर तू शीश झुकाये।।

सुख के खातिर जोड़ी माया , सुख तो हाथ न आया।
जिस कारण सुख उपजे मन में , वो ठाकुर बिसराया।
तुझे कैसे कोई समझाये , तुझको ईश्वर नजर न आये।।

जग की वास्तु स्थिर नहीं कोई , पल पल मिटती जाये।
घट में जलती जीवन ज्योति , वह सब में मुस्काये।
क्यों उनसे तय नैनं चुराये, तुझको ईश्वर नजर न आये।।

कैसे मन से करता है तू , जग का यह व्यवहारा।
इक चित्त होकर कभी न सोचा , कोण है करनेवाला।
क्यों मिथ्या ही गर्व जताये , तुझको ईश्वर नजर न आये।।

सतगुरु शरण पड़े बिन कोई , भेद न उसका पाया।
कण कण में कर आत्म दर्शन , रमा सभी हरी राय।
तू आनंद में ही समाये , तुझको ईश्वर नजर न आये।।

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